Corona Virus Covid-19 Stats India
- Confirmed : 3,02,76,685
- Active : 5,70,400
- Recovered : 2,92,97,755
- Death : 3,96,636
Vaccine Dose Administered - 32,17,60,077
Data Updated till 27.6.2021
Source : https://www.covid19india.org/
Corona Virus Covid-19 Stats India
Vaccine Dose Administered - 32,17,60,077
Data Updated till 27.6.2021
Source : https://www.covid19india.org/
केंद्रीय बजट 2021 में हेल्थ सेक्टर में केंद्र सरकार की ओर से देश भर में 4 नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी बनाए जाने की घोषणा हुई है। आत्मनिर्भर स्वास्थ्य योजना में इन वॉयरोलॉजी लैब को शामिल किया जाएगा। रोहतक पीजीआई इनमें से एक लैब पर अपना दावा पेश करने जा रहा है। इसके लिए जल्द ही एक प्रस्ताव बना राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा।
राज्य सरकार इसे केंद्र के पास भेजेगी। पीजीआई रोहतक का ये दावा कमजोर भी नहीं है। कोरोना महामारी के दौर में पीजीआईमें कोविड टेस्टिंग की सुविधा की क्षमता और को-वैक्सीन के ट्रॉयल रिजल्ट को देखते हुए पीजीआई रोहतक इस दौड़ में सबसे आगे भी दिख रहा है।
अभी देश में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी लैब केवल पुणे में ही है। पीजीआई डायरेक्टर डॉ. रोहताश यादव का कहना है कि पीजीआई की वीआरडीएल लैब में आठ से 10 जिलों से आने वाले कोरोना सैंपल टेस्टिंग कर संक्रमित मरीजों का पता लगाया। वर्तमान में पीजीआई की वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैब में रोहतक, झज्जर, चरखी दादरी जिलों से आने वाले कोरोना सैंपल की टेस्टिंग का काम एक्सपर्ट की टीम कर रही है। संस्थान में वर्तमान में उपलब्ध संसाधनों और पर्याप्त स्थान को देखते हुए केंद्र सरकार की ओर से चार में से एक नेशनल वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट का आवंटन होने की पूरी उम्मीद है।
संक्रामक बीमारियों के इलाज के लिए अलग से विभाग और अस्पताल भी बनेगा, 30 करोड़ बजट का अनुमान
लैब का दर्जा मिला तो टेस्टिंग- रिसर्च जैसी सुविधाएं होंगी उपलब्ध
कोरोना महामारी को देखते हुए देश में खुले वाले चार इंस्टीट्यूट में भविष्य में आने वाली महामारी का पता लगाने के लिए टेस्टिंग, रिसर्च जैसी अन्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। ऐसे में पंडित बीडी शर्मा हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी और पीजीआई प्रशासन ने संस्थान में संचालित वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैब में उपलब्ध संसाधनों के आधार पर एक वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट आवंटन के लिए दावेदारी करने का फैसला लिया है। पीजीआई निदेशक डॉ. रोहतास यादव का दावा है कि वो प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार के जरिए केंद्र को भेजेंगे।
इंस्टीट्यूट स्थापित होने के बाद सैंपल टेस्ट के लिए पुणे लैब में नहीं भेजने होंगे: पीजीआई निदेशक डॉ. रोहतास यादव बताते हैं कि सरकार की ओर से यदि पीजीआई में इंस्टीट्यूट संचालन की मंजूरी मिलती है तो पूरे हरियाणा और आसपास के राज्यों से कोरोना जैसे अन्य कई वायरस का पता लगाने के लिए पुणे और दिल्ली की लैब में सैंपल नहीं भेजने पड़ेंगे। रिसर्च और संक्रमण की डायग्नोसिस भी कर सकेंगे। एक इंस्टीट्यूट स्थापित होने में औसतन 30 करोड़ की लागत आएगी।
वायरोलॉजी लैब की क्या है अहमियत ऐसे समझें
बीएसएल-2: पीजीआई की वीआरडीएल लैब को बायो सेफ्टी लेवल-2 का दर्जा है। लैब में वायरस, फंगस, बैक्टीरिया, हेपेटाइटिस बी व सी और स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों के सैंपल की जांच की जाती है।
बीएसएल-3: यहां दूसरे देशों से आए या फिर नए पैथोजन पर काम होता है। लैब में यलो फीवर, वेस्ट नाइल वायरस और टीबी के बैक्टीरिया भी पलते हैं। हमारे देश में भारतीय वायरोलॉजी संस्थान पुणे इसी श्रेणी का है।
अभी हमारी लैब को बीएसएल-2 का दर्जा, अब भी 3 जिलों के सैंपल जांच रहे
अधिकारी बताते हैं कि कोरोना काल के 11 माह में पीजीआई की वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैब में प्रदेश के 50% जिलों से आए 4,12,641 से ज्यादा लोगों के कोरोना सैंपल टेस्ट किए जा चुके हैं। अब भी 3 जिलों के सैंपल जांच यहीं होती है। लैब को बीएसएल-2 का दर्जा प्राप्त है।
तीन रियल टाइम पीसीआर मशीन, दो हजार सैंपल टेस्ट की क्षमता: पीजीआई की वायरोलॉजी लैब में रोजाना औसतन 2000 सैंपल टेस्टिंग की क्षमता है। यहां 3 रियल टाइम पीसीआर मशीन उपलब्ध हैं। 24 घंटे में 2000 ज्यादा सैंपल टेस्ट करने की लैब के पास क्षमता है।
कोरोनावायरस के इलाज में प्रयोग होने वाली मलेरिया की दवा हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को लेकर इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने रिवाइज्ड एडवायजरी जारी की है। अब इसका सेवन कोरोना वॉरियर्स कर सकेंगे। अभी तक इसे केवल लक्षण वाले या फिर कोरोना संक्रमितों को दिया जाता था।
आईसीएमआर ने कहा कि अस्पतालों में लोगों का इलाज में जुटे एसिम्प्टमेटिक हेल्थकेयर, कंटेनमेंट जोन में तैनात फ्रंटलाइन वर्कर, पुलिस, सशस्त्र बल के जवान भी हाइड्रोक्सीक्लोरोक्ववीन का सेवन कर सकते हैं। काउंसिल ने यह फैसला राष्ट्रीय स्तर पर दवा के असर को लेकर स्टडी करने वाली नेशनल टास्क फोर्स की रिपोर्ट के बाद किया है। हालांकि काउंसिल ने यह भी साफ किया है कि ये दवा केवल ऐहतियात के तौर पर लेनी चाहिए। इसे लेने का मतलब ये नहीं है कि आपको कोरोना नहीं हो सकता है।
कमेटी ने स्टडी में पाया कि इससे संक्रमण के दर में कमी होती है
नेशनल टास्क फोर्स के विशेषज्ञों ने कोरोना प्रभावित और गैर कोरोना प्रभावित इलाकों में काम करने वाले सभी स्वास्थ्यकर्मियों पर इसका अध्ययन किया। विशेषज्ञों ने पाया कि इससे संक्रमण की दर कम होती है। इसमें कहा गया है कि यह दवा उन लोगों को नहीं देनी चाहिए, जो रेटिना संबंधी बीमारी से ग्रसित हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि इस दवा को 15 साल से कम आयु के बच्चों तथा गर्भवती और दूध पिलाने वाली महिलाओं को न दिया जाए। दवा औपचारिक सहमति के साथ किसी डॉक्टर की निगरानी में दी जाए।
कई देशों को भेजी गई दवा
कोरोना संक्रमण से पूरी दुनिया प्रभावित है। दुनिया के बड़े-बड़े देश इसकी वैक्सीन तैयार करने में जुटे हैं। कई विशेषज्ञों ने शुरूआत में ही पाया कि हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की दवा कोरोना के इलाज में काफी प्रभावी है। इसके बाद अमेरिका, इजरायल सहित कई देशों को भारत ने ये दवा सप्लाई की। भारत इस दवा का बड़ा सप्लायर है।
कुरुक्षेत्र जिले के लाडवा उपमंडल में पांच कोरोना संक्रमित मिले हैं। जिससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। दरअसल स्वास्थ्य विभाग की ओर से लाडवा मंडी में सब्जी विक्रेता व आढ़तियों के कोरोना सैंपल लिए थे, जिसमें से पांच लोगों की रिपोर्ट पॉटिजिव आई है।
कुरुक्षेत्र जिला के लाडवा विधानसभा में मिले 5 कारोना पोजिटिव, पॉजिटिव केस मिलने से मचा हड़कंप, प्रशासन इलाके को कंटेन्मेंट जॉन बनाकर सील करने की तैयारी में जुटा. एक केस लाडवा के वार्ड 9 ओर दूसरा केस वार्ड 11, तीसरा केस गांव बकाली, चौथा केस गांव खेड़ी दबदलान ओर पांचवा केस गोरला गांव से मिला है.
कुरुक्षेत्र में अब टोटल एक्टिव केस हुए 11 कुरुक्षेत्र में धीरे धीरे करोना केस का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी व्रत रखने से सुख-समृद्धि और वैभव की प्राप्ति होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, च...