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Thursday, 21 May 2020

नगर निगम रोहतक द्वारा चेकिंग अभियान, नियमों का उल्लंघन पर काटे दुकानदारों के चालान।

नगर निगम रोहतक द्वारा चेकिंग अभियान, नियमों का उल्लंघन पर काटे दुकानदारों के चालान

रोहतक, कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए लागू किए गए लॉकडाउन में नियम तोड़ने वाले व्यापारियों से नगर निगम सख्ती से निपट रहा है। 
 एक हजार से लेकर 5 हजार रुपये तक के चालान काटे जा चुके हैं। एक दिन मे कई दुकानों पर जुर्माना किया गया। बिना नंबर के दुकान खोलने पर जुर्माना लिया जाएगा उसके बावजूद भी दुकान खुली मिलने पर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अथवा दुकान सील करने में जरा भी देरी नहीं की जाएगी। 

आज नगर निगम की टीम ने  माननीय आयुक्त महोदय श्री प्रदीप गोदारा जी के आदेशानुसार नगर निगम LO श्री सुरेंद्र गोयल जी के मार्गदर्शन में asi संदीप राठी ,परमजीत, कृष्ण लाल , ,सुमित फोगाट ,नरेंद्र व सुशील कुमार की टीम ने रोहतक शहर की विभिन्न मार्किटों में जगह जगह सुबह शाम विशेष अभियान चलाकर दुकानों के चालान किये कई दुकानें आज भी शाम 5 बजे के बाद खुली हुई मिली जिसमें मुख्य तौर से रेलवे रोड जैन साइकिल स्टोर का 5000 का चालान, और हूडा कॉम्प्लेक्स में MRF TYRE SHOP का 5000 का चालान और दुर्गा भवन पर बंगाली स्वीट्स का चालान और सर्कुलर रोड पर बाइक मिस्त्री की दो दुकानों का चालान किया गया

रोहतक की इस सौ साल पुरानेे इस प्याऊ की कहानी है बड़ी निराली, लाहौर हाईकोर्ट में चला था केस.

सौ साल पुरानेे इस प्याऊ की कहानी है बड़ी निराली, लाहौर हाईकोर्ट में चला था केस

यहां शहर में रेलवे रोड पर चलता पंचायती प्याऊ। करीब सौ साल पुराना। वाटर कूलरों के दौर में भी गंगा सागर (पानी रखने का एक पात्र) में पानी पिलाकर पुरानी परंपरा को जिंदा रखे हुए है। खास इसलिए भी कि इसे शुरू कराने के लिए लाहौर हाई कोर्ट तक की शरण लेनी पड़ी थी और इसे स्थापित करने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा था।

आज जिस जगह पर प्याऊ है, वह कभी नगरपालिका की जमीन हुआ करती थी। रेलवे रोड बाजार के दुकानदारों ने चंदा इकट्ठा कर यहां प्याऊ लगवाने का कार्य शुरू किया। तत्कालीन नगर पालिका प्रशासन को जब प्याऊ स्थापित करने का पता चला तो उसने एतराज जताया। पालिका प्रशासन ने प्याऊ के निर्माण पर रोक लगाते हुए इसे तोड़ने के आदेश दे दिए। लाख मिन्नतों के बावजूद पालिका प्रशासन ने जब अडिय़ल रवैया नहीं छोड़ा। प्याऊ को तोड़ने के लिए कर्मचारी भेज दिए। दुकानदारों ने विरोध किया। एकजुट हुए दुकानदारों ने रातों-रात निर्माण कार्य कराया। अगले दिन से ही पानी पिलाने की शुरूआत कर दी गई।

पंचायती प्याऊ को स्थापित कराने वाले लाला मथुरा प्रसाद गुप्ता के पोते और वर्तमान प्रधान अनिल गुप्ता बताते हैं कि राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते मामले ने इतना तूल पकड़ा कि जिलेभर में चर्चा का केंद्र बन गया। नगर पालिका ने खुद का पक्ष कमजोर होते देख दुकानदारों पर दबाव बनाने के लिए कानूनी दांव खेल दिया। रेलवे रोड के दुकानदारों को कानूनी नोटिस भेजा गया। दुकानदारों ने इस पर हार नहीं मानी और तत्कालीन लाहौर हाई कोर्ट में केस डाल दिया। फैसला भी उनके पक्ष में आया। तभी से निर्बाध रूप से प्याऊ संचालित किया जा रहा है।

पांच साल, 50 तारीखों के बाद जीता केस

प्याऊ का संचालन कराने के लिए लाला मथुरा प्रसाद गुप्ता, लाला पदम सैन जैन व रूपचंद जैन समिति के पहले इंचार्ज बने। करीब पांच साल तक लाहौर हाई कोर्ट में केस चला। 50 तारीखें पड़ीं। तीनों ही इंचार्ज बारी-बारी से कोर्ट की तारीखों पर जाते। आर्थिक तंगी हुई तो लड़ाई लडऩे के लिए चंदा इकट्ठा करने में भी संकोच नहीं किया। पांच सौ किलोमीटर दूर लाहौर हाई कोर्ट में तारीख से दो दिन पहले निकलना होता था। पंजाब के गुरदासपुर के रास्ते लाहौर तक सफर तय किया जाता था। आखिर लाहौर हाई कोर्ट ने दुकानदारों के पक्ष में फैसला सुनाया।

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